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देवकीनंदन:रामायण जीवन को संवारने के लिए सुंदर ग्रंथ

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विश्व शांति सेवा समिति कानपुर एवं विश्व शांति सेवा चेरिटेबल ट्रस्ट के तत्वाधान में चतुर्थ दिवस पर हजारों की संख्या में भक्तों ने महाराज श्री के श्रीमुख से कथा का श्रवण किया।

कथा व्यास पर विराजमान श्री देवकीनंदन ठाकुर जी IMG-2019 hod

संवाददाता हरिओम दिवेदी कानपुर श्री राम कथा के चतुर्थ दिवस की शुरुआत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई।
आज कथा पंडाल में भाजपा विधायक श्री महेश त्रिवेदी, संगठन मंत्री श्री बृज बहादुर जी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करवाई एवं महाराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। संस्था की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

संवाददाता:हरि ओम द्विवेदी:-कानपुर पं. देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा की मैं हमेशा युवाओं से कहता हूं की अपना संग सुधारो, आपका जैसा संघ होगा आपके जीवन में वैसा रंग चढ़ेगा। कई बार ऐसा होता है की कई धर्मार्थी लोग जिनको संग कभी कभी गलत मिल जाता है और वो अपना ही नहीं बल्कि अपने परिवार का भी बुरा कर बैठते हैं।
महाराज श्री ने आगे कहा कि रामायण हमारे जीवन को सुधारने के लिए, संवारने के लिए बड़ा ही सुंदर ग्रंथ है। इसमें एक एक चीज हमें बहुत अच्छे से समझाई गई है। आजकल कलयुग में ऐसे भी लोग हैं जो ईश्वर से आपका ध्यान हटाकर अपनी और आपका ध्यान खिंचते हैं। वो कहते हैं की भगवान को किसने देखा है उनकी तरफ क्यों जाते हो ? उन महानुभावों से यह पूछना चाहिए की बिना ईश्वर के कही गद्दी है क्या ? ईश्वर ने गुरू तत्व इसिलिए प्रकट किया ताकी वो गोविंद तत्व तक पहुंचा सके।
उन्होंने कहा कि मेरी सरकार से भी विनती है की ईश निंदा बर्दाश्त नहीं होने चाहिए हमारे भारत में। हमारे राम कृष्ण को कोई उलटा नहीं बोले ऐसा कानून बनना चाहिए। कई ऐसे देश हैं जहां ईश निंदा पर कानून है। हमारे राम, कृष्ण जी ने किसी के लिए बुरा नहीं किया, ना बोला , ना सूना बल्कि पूरे विश्व को मार्गदर्शन दिया है।
महाराज श्री ने कहा कि राम मंदिर को संकल्पित यह कथा हम श्रवण कर रहे हैं और भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं की सुप्रीम कोर्ट में जो फैसला आने वाला है भगवान ऐसी कृपा करें की फैसला देने वालों के जो विचार हैं वो सत्य को स्विकार करे और सत्य यही है।
महाराज श्री ने कहा कि आजकल कई लोग ऐसे हैं जिनका धर्म के प्रति रूझान सही नहीं है। कई लोग ऐसे दिखते हैं जो सिर्फ धर्मात्मा दिखते हैं होते नहीं हैं। जब जब लोगों की अरूचि धर्म में होती है अथवा जब जब धर्म कम होता जाता है तब तब भगवान अवतार लेकर आते हैं, चाहे वो कंश, रावण, ह्रणयकश्यप, हो, जब जब धर्म की हानि हुई है तबतब भगवान अवतार लेकर आए। अभी भी कुछ लोग राम के विरूद्ध बाते करते हैं, तो फिर से राम को तो आने की आवश्यकता नहीं है लेकिन राम मंदिर के निर्माण की आवश्यकता अवश्य है, जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी को कुछ सीखने को मिल सके।
आज कार्यक्रम में सर्व श्री वीरेंद्र गुप्ता, बिपिन बाजपेई, सतीश गुप्ता, शिव शरण वर्मा, राम गोपाल बांग्ला, सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी, निरंकार गुप्ता, मंजू शुक्ला, डॉक्टर यू पी सिंह, आदि समस्त समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

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