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केस्कों मुख्यालय में कर्मचारियो व अधिकारियों की सम्पन्न हुई सभा

 
कानपुर नगर,  विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा केंद्र व राज्य स्तर पर चल रही निजीकरण की कार्यवाही के विरोध में तथा पुरानी पेंशन हेतु देश के लगभग 15 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर आगामी 8 व 9 जनवरी को दो दिन की राष्ट्रव्यापी हडताल करेगे, जिसमें विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ0प्र0 के आवाहन पर प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के तमाम कर्मचारी भी हडताल मे शामिल हागे। इसी संदर्भ में केस्कों मुख्यालय गेट पर एक सभा का आयोजन किया गया।
           सर्घ समिति के सदसयों का कहना है कि बिजली उत्पादन के क्षेत्र में निजी धरानों के घोटाले से बेैंको का ढाई लाख करोड रू0 पहले ही फंसा हुआ है, फिर भी निजी घरानों पर कोई कठोर कार्यवाही करने के बजाय केंद्र सरकार नए बिल के जरिये बिजली आर्पूिर्त निजी घरानो को सौंपकर और भी बडे घोटाले की तैयारी कर रही है। सभा में उपस्थित शैलेन्द्र दुबे, कपिल मुनी प्रकाश, राजीव सिह, मनीष कुमार गुप्ता, अश्वनी चतुर्वेदी, भगवान मिश्रा, पुसेलाल, वीके अवस्थी, शंशाक अग्रवाल, सौरभ गौतम, गौरव दीक्षित आदि वक्ताओं ने बताया कि इलेक्ट्रिकसिटी बिल के जनविरोधी प्रतिगामी प्राविधानों का बिजली कर्मचारी व अभियन्ता संगठन शुरू से ही विरोध करता रहा है और इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार को लिखित तौर पर कई बार दिया भी जा चुका है। कहा संशोधन के अनुसार हर उपभोक्ता को बिजली लागत का पूरा मूल्य देना होगा, जिसके अनुसार बिजली की दरहें 10 से 12 रू0 प्रति यूनिट हो जायेगी। कहा घाटे के नाम पर बिजली बोर्डो के विघटन का प्रयोग पूरी तरह असफल साबित हुआ है। मांग है कि बिल को वापस लेना, इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 की पुनर्समीक्षा और राज्यों में विघटित कर बनाई गयी बिजली कं0 का एकीकरण कर बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण का करेल और हिमाचल प्रदेश की तरह एक निगम बनाना है। कहा इलेक्ट्रिक सिटी संविधान की समवर्ती सूची में है और राज्य का विषय है लेकिन यदि अमेण्टमेंट बिल पारित हो गया तो बिजली के माममले में केंद्र का वर्चस्व बढेगा और राज्यों की शक्ति कम होगी। कहा इस सम्बन्ध में बिजली उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों की राय ली जानी चाहिये।

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