मेरे परम मित्र प्रखर वक्ता भाजपा नेता सतीश चंद्रा की जलती कलम

उन्नाव

आप उन्नाव में किसी से भी पूँछ लीजिए विपक्ष से कौन अच्छा लड़ेगा ज़्यादातर लोग अन्नू टंडन (कोंग्रेस) का नाम बताएँगे। पूँछिए सपा का बड़ा नेता कौन, अस्सी प्रतिशत लोग एक नाम ना बता पाएँगे।

बग़ल में कानपुर में किसी से भी पूँछिए वह श्री प्रकाश जायसवाल (कोंग्रेस) का नाम लेगा।
उसके बग़ल में फ़र्रुख़ाबाद – हर आदमी सलमान ख़ुर्शीद (कोंग्रेस) का नाम लेगा।
इधर बाराबंकी – P L पुनिया (कोंग्रेस) का नाम बच्चे बच्चे की ज़ुबान पर है।
प्रताप गढ़ – राजकुमारी रत्ना सिंह और प्रमोद तिवारी सबसे क़द्दावर नेता हैं विपक्ष के।

संक्षेप में यदि लोकसभा के परिप्रेक्ष्य में बात की जाए तो कोंग्रेस के चाहे जितने बुरे दिन आ गए हों उसके पास हर जिले में ऐसे नेता हैं जो अपने दम पर एक लाख वोट पाने की क्षमता रखते हैं। ख़ास बात यह भी है कि भाजपा में सपा बसपा के तो सारे नेता आ गए लेकिन कोंग्रेस के अधिसंख्य बड़े नेता कोंग्रेस में ही हैं।

अखिलेश को इसी लिए अपरिपक्व नेता कहा जाता है कि विधान सभा में ज़हब कोंग्रेस के पास चुनाव लड़ने लायक नेता ना थे तो उन्होंने कोंग्रेस को सारी सीटें दे दीं। वहीं लोकसभा में बसपा के पास नेता नहीं बचे हैं टिकट लेने के लिए तो अपने भैय्या जी इधर बसपा को समर्थन टिका आए और जीवन दान दे दिया।

देखिएगा उत्तर प्रदेश में महा गठबंधन से बेहतर चुनाव कोंग्रेस लड़ेगी। मुस्लिम वोटर परेशान है लगातार सपा पर भरोसा कर खाए जा रहे धोखे से। क्षेत्र में जिस किसी समझदार मुस्लिम से बात होती है, अधिसंख्य कोंग्रेस के ही पक्ष धर दिखते हैं। और यह माहौल वक़्त के साथ आगे और बढ़ना है। अभी महा गठबंधन की ख़ुशियाँ एक बार थोड़ी ठंडी हों तो देखिएगा भाजपा से दुश्मनी मानने वाला सपाई वाला यादव वोटर ख़ुद बसपा की जगह कोंग्रेस की ओर भागेगा।

उत्तर प्रदेश में मुक़ाबला त्रिकोणीय होगा ज़बरदस्त वाला। हर वह सीट जिस पर मुस्लिम बीस से पैंतालीस प्रतिशत तक है, और हर सुरक्षित सीट पर वोटों का ज़बरदस्त बँटवारा है, त्रिकोणीय संघर्ष है। ज़बरदस्त त्रिकोणीय संघर्ष होगा और ऐसी अधिसंख्य सीटें भाजपा निकाल कर ले जाएगी।

कोंग्रेस जीतेगी तो नहीं लेकिन ना चाहते हुवे भी महा गठबंधन को जीतने भी नहीं देगी।

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