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हाई कोर्ट के जजमेंट के ऊपर दिल्ली पुलिस को फटकार

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दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट और हाई कोर्ट के वकील कमलेश गुप्ता  ने बताया कि हाई कोर्ट के जजमेंट के ऊपर दिल्ली पुलिस को फटकार

तीस हजारी कोर्ट विवाद मामले को दिल्ली हाईकोर्ट के डबल बेंच ने स्वत संज्ञान लेकर रविवार के दिन स्पेशल सुनवाई की , सुनवाई के दौरान जब डिप्टी कमिश्नर से सवाल-जवाब के बाद इनसे पूछा गया कि ” कोर्ट के बाहर यदि एक वकील की गाड़ी गलत जगह पार्क भी हो गई थी तो आपने उस वकील को लाकअप में बंद कर के मारपीट क्यो की , उसके बारे में पूछताछ करने आए वरिष्ठ अधिवक्ताओं पर लाठियां क्यों चलाई !

इस सवाल के जवाब में मैडम जी जमीन देख रही थी

फिर जज ने ही बताया कि ” कोर्ट के अंदर और परिसर में पार्किंग और बेंच पर पहला अधिकार अधिवक्ता का होता है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है , चलिए कांस्टेबल कोई ये बात नहीं पता थी इसलिए उसने गाड़ी पार्किंग के लिए यदि अधिवक्ता के साथ बदसलूकी की तो कम-से-कम आपको रोकना चाहिए था ”

इसके बाद कोर्ट ने इनको ढंग से फटकार लगाई और जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया नतीजा आज न्यूज में है कि मैडम रो रही थी कोर्ट से बाहर आने के बाद

कानून की जानकारी रखिए मैडम वर्ना क्या पता ये रोने की शुरुआत हो , उल्टे-सीधे ढंग से नेतृत्व करेंगी तो आगे और भी सैकड़ों फटकार पड़ सकती है

समय दोपहर करीब तीन बजे, हाईकोर्ट में तीस हजारी कोर्ट में हुए बवाल की सुनवाई शुरू हुई। हाईकोर्ट की कोर्ट नंबर-एक में वकीलों का भारी जमावड़ा और एक साइड में पुलिस के आलाधिकारियों की मौजूदगी रही।

जैसे-जैसे सुनवाई आगे बढ़ती गई, पुलिस अधिकारियों का चेहरा उतरता गया। जैसे ही मामले की सुनवाई समाप्त हुई, तो कोर्ट रूम से बाहर आते ही उत्तरी दिल्ली की डीसीपी मोनिका भारद्वाज की आंखों में आंसू आ गए।

हाईकोर्ट में वकीलों और पुलिस अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए बराबर का मौका दिया गया, लेकिन जब पीठ ने घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस से सवाल पूछे तो पुलिस आत्मसुरक्षा में चली गोली के अलावा कोई दलील नहीं दे पाई।

इसके साथ ही जब पुलिस ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में एसआईटी जांच की जा रही है, घटना में शामिल एक एएसआई को निलंबित किया गया है और एक का तबादला किया गया है, तो पुलिस की इस कार्रवाई पर अदालत ने असंतुष्टि जताते हुए मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए।

इसके साथ ही अदालत ने एकाएक पुलिस के बर्बर और कथित आपराधिक रवैये पर चिंता जताते हुए दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त संजय सिंह और अतिरिक्त डीसीपी हरिंदर सिंह के तबादले के आदेश देने के साथ ही दूसरे आरोपी एएसआई को भी निलंबित करने के आदेश दिए।

चूंकि अदालत के समक्ष पुलिस के पास सफाई देने के लिए कोई अन्य पुख्ता कारण नहीं था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले के आदेश पर सभी पुलिस कर्मियों की चिंता और बढ़ गई। इस आदेश के साथ ही अदालत ने सुनवाई समाप्त कर दी।

सुनवाई समाप्त होते ही शाम करीब 4 बजे तीस हजारी कोर्ट क्षेत्र की डीसीपी मोनिका भारद्वाज कोर्ट रूम से बाहर निकलीं तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। इस दौरान उनके पास मौजूद अन्य अधिकारी भी उनकी हालत को देखकर परेशान हो गए।

इस बीच डीसीपी ने अपने आंसुओं को रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह नहीं रोक पाईं। इस बीच उनके सहयोगी पुलिस कर्मी उन्हें दूसरी ओर से अदालत से बाहर ले गए। तीस हजारी कोर्ट उत्तरी जिला पुलिस के क्षेत्र में स्थित है।

तीस हजारी कोर्ट में 1988 में पहली बार वकीलों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज की बड़ी घटना को अंजाम दिया गया था। 31 साल पहले हुई इस घटना के समय किरन बेदी तत्कालीन डीसीपी थीं। बीते शनिवार को पुलिस द्वारा वकील पर कथित रूप से गोली चलाने की घटना के समय भी इस क्षेत्र में डीसीपी महिला पुलिस अधिकारी मोनिका भारद्वाज हैं। तीस हजारी कोर्ट में गोली चलने की घटना दिल्ली की अदालतों के इतिहास की ऐसी पहली घटना है जब खुलेआम पुलिस के साथ हुए बवाल में वकील पर गोली चली हो।

सुनवाई से पहले बंद कमरे में हुई न्यायाधीशों की बैठक
तीस हजारी अदालत में वकीलों और पुलिस के बीच झड़प से संबंधित मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को सुनवाई शुरू करने का फैसला किया। महापंजीयक (आरजी) दिनेश कुमार शर्मा के मुताबिक, इस घटना की मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशों ने सुबह बंद कमरे में बैठक की। इस बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और दिल्ली सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव भी शामिल थे। इस बैठक में सुनवाई का समय तय किया गया। इस मुद्दे पर बैठक के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र, नगर पुलिस प्रमुख, मुख्य सचिव, दिल्ली बार एसोसिएशन और दिल्ली बार काउंसिल को नोटिस जारी किया। इस बैठक से पहले भी इस मामले को लेकर शनिवार को हाईकोर्ट ने पांच घंटे से भी अधिक समय तक बैठक की। यह बैठक रात करीब 9:40 मिनट पर खत्म हुई थी। इस घटना के बाद तीस हजारी कोर्ट में पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

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