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झाबुआ में कांतिलाल भूरिया की जीत, ऐसा रहा है सियासी सफर

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झाबुआ। झाबुआ विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने भाजपा के भानू भूरिया को 27 हजार वोटों से हराकर जीत दर्ज की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रहें भूरिया ने पहले मतगणना के पहले राउंड से जो बढ़त बनाई तो फिर पीछे नहीं हुए। कांतिलाल कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शुमार हैं और अब इनके विधायक बन जाने से कमलनाथ सरकार में इनकी जगह को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। 70 के दशक में झाबुआ कॉलेज में भूरिया ने छात्र संघ चुनाव जीता था। इसके बाद 1977 में थांदला विधानसभा से कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया लेकिन पहले चुनाव में ही हार गए। 1980 में फिर थांदला से जीतकर विधायक बन गए।

मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह ने संसदीय सचिव बना दिया। 1998 तक थांदला से विधायक रहे। इस बीच दो बार प्रदेश में मंत्री बने। 1998 में रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट से चुनाव जीतते हुए सांसद बने।मनमोहन सिंह सरकार में दो बार मंत्री बनने का मौका मिला। 1998, 1999, 2004, 2009 के लोकसभा चुनाव जीते। 2014 का लोकसभा चुनाव हार गए। 2015 में इसी सीट से लोकसभा का उपचुनाव हुआ तो जीत गए। 2019 का लोकसभा चुनाव हार गए।

लोकसभा सीट पर सबसे बड़ी जीत दर्ज है कांतिलाल भूरिया के नाम
रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट पर सबसे बड़ी जीत कांतिलाल भूरिया के नाम दर्ज है। 1999 के चुनाव में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने भाजपा के दिलीपसिंह भूरिया को सर्वाधिक 149377 मतों से पटखनी दी थी। कांतिलाल को 371842 मत और दिलीपसिंह को 222465 मत मिले थे।

पहली बार बने झाबुआ से विधायक
झाबुआ विधानसभा सीट पर कांतिलाल भूरिया पहली बार विधायक बने। यहां जितने भी प्रत्याशी मैदान में थे वे पहली बार चुनाव लड़ रहे थे। कांतिलाल ने उपचुनाव में टिकट पाने के लिए पूरा जोर लगा दिया था। जब टिकट मिला तो सीएम कमलनाथ से लेकर सरकार के कई मंत्री उनके प्रचार के लिए सड़क पर उतरे। कांतिलाल भूरिया ने चुनाव में लोगों से भावनात्मक अपील भी की थी कि यह उनका आखिरी चुनाव है। अपनी इस बात से उन्होंने साफ संकेत दिया था कि इसके बाद वे कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे।

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