शहर का छोटा काशी आनंदेश्वर परमट मंदिर का कर्ण से है अटूट संबंध

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शहर में छोटा काशी नाम से प्रसिद्ध परमट मंदिर का कर्ण से है नाता, समाहित है अद्भुत अन सुने पौराणिक कथाएं आनंदेश्वर धाम परमट समेत शहर के लगभग सभी शिवालयों में दर्शन को बड़ी तादाद में भक्त पहुंच रहे हैं। हर-हर महादेव के जयकारों के बीच भक्तों ने बाबा को जल से किया अभिषेक।

आनंदेश्वर शिव मंदिर परमट img hod

आनंदेश्वर धाम परमट मंदिर : सावन महापर्व के श्रावण मास में पहले सोमवार को देश भर के शिवालयों में भक्तों की कतार सुबह से देखने को मिल जाती है। वही शहर के कहे जाने वाले छोटे काशी जो गंगा किनारे बना शहर का सुप्रसिद्ध प्राचीन आनंदेश्वर धाम परमट अपने आप में महाभारत काल का इतिहास समेटे है। सावन के पहले सोमवार के मौके पर आनंदेश्वर धाम “परमट” में भोलेनाथ के दर्शन के लिए एक दिन पहली रात से भक्तों की लम्बी कतारें लग जाती है।और भक्तों के बम बम भोले के उद्घोष से आनंदेश्वर धाम परमट में चारो तरफ भोले के जयकारे से मंदिर प्रांगण और और इस पास क्षेत्र गुंजायमान हो जाता है। आनंदेश्वर परमट शिव मंदिर में दूध, बेल पत्र भांग धतूरा धूप इत्यादि और गंगा जल से बाबा का अभिषेक की विधि विधान से पूजन किया जाता है वहीं इस लिए पुलिस प्रशासन द्वारा भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से चुस्त-दुरुस्त तैनात रहतीं हैं।

आनंदेश्वर शिव मंदिर परमट img hod

आनंदेश्वर धाम परमट समेत शहर के लगभग सभी शिवालयों में दर्शन को बड़ी तादाद में भक्त पहुंच रहे हैं। हर-हर महादेव के जयकारों के बीच भक्तों ने बाबा को जल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। कोरोना संक्रमण के नियमों का पालन करते हुए बाबा आनंदेश्वर मंदिर में मंगला आरती के बाद भक्तों को गर्भ गृह में प्रवेश नहीं दिया गया।

टनल सिस्टम के आधार पर भक्तों ने दूर से ही आनंदेश्वर धाम परमट वाले बाबा का जलाभिषेक किया। बाबा आनंदेश्वर धाम परमट में भोर पहर मंगला आरती के बाद मंदिर में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। पुलिस बल ने शारीरिक दूरी का पालन कराते हुए एक बार में सिर्फ 50 भक्तों को ही मंदिर परिसर में प्रवेश दिया। जूना अखाड़ा के पदाधिकारी और मंदिर के पुजारियों ने गर्भ गृह में जाकर बाबा की मंगला आरती और पूजन अभिषेक किया। मंगला आरती के बाद भक्तों को गर्भ गृह के बाहर से ही दर्शन करने की प्रणाली सुचारू की गई।

सावन के पहले सोमवार पर कानपुर के सबसे सुप्रसिद्ध आनंदेश्वर धाम के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। मंदिर से करीब एक किलोमीटर तक बाबा भोले के दर्शन के लिए भक्तों की लाइन लगी हुई हैे शहर ही नहीं बल्कि आस पास के जिलों से लोग यहां आते है।

आनंदेश्वर धाम परमट में निगरानी के लिए करीब एक दर्जन सीसीटीवी लगाए गए है। जिनकी मानीटरिंग के लिए मंदिर परिसर ही एक पुलिस कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। इसके अलावा पूरे शहर के थानों को भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। जाम से बचने के लिए मंदिर आने के लिए वाहनों के रूट  बदलाव किया गया है।

वीआईपी रोड स्थित टेफ्को तिराहे से रेन बसेरा तक केवल दो पहिया वाहन जा सकेंगे। ग्रीनपार्क की तरफ से मंदिर आने वाले रास्ते पर बैरिकेटिंग लगाकर वहां से वाहनों को डायवर्ट किया गया है। वाहन पार्किंग के लिए जगह जगह स्थान दिए गए है।

 

कर्ण से जुड़ा शहर और आनंदेश्वर धाम परमट का रहस्य

कहते हैं शहर का नाम भी करण के नाम पर था पौराणिक काल में शहर को कर्णपुरम के नाम से जाना जाता था बाद में उसका नाम कानपुर हो गया। वही आनंदेश्वर धाम परमट के महंत ने बताया यहां पर कर्ण नित दिन पूजन किया करते थे। सिर्फ कर्ण को पता था कि यहां पर भगवान शिव का शिवलिंग है। आनंदेश्वर धाम परमट में कर्ण गंगा में स्नानं करने के बाद गुपचुप तरीके से पूजा करते थे। इसके बाद अदृश्य हो जाते थे, लेकिन कर्ण को पूजा करते हुए यहां पर एक गाय ने देखा था। उस स्थान पर जाते ही गाय के थन से दूध निकलने लगा। गंगा किनारे बसे गांव में रहने वाले गाय के मालिक ने देखा कि गाय को दुहने के वक्त इसके दूध नहीं निकलता है। उसने गाय पर नजर रखना शुरू कर दिया।

ग्वाले ने देखा कि गाय जंगल में गंगा किनारे जाकर पूरा दूध एक ही स्थान पर निकाल देती है। उस ग्वाले ने इसकी जानकारी अन्य ग्रामीणों को दी। जब ग्रामीणों ने उस स्थान की खुदाई की तो वहां शिवलिंग निकला।

ग्रामीणों ने शिवलिंग को गंगा जल और दूध से स्नान करा कर गंगा किनारे स्थापित किया। बदलते वक्त के साथ बाबा आनंदेश्वर का यह मंदिर भव्य बनता चला गया। इस मंदिर को भक्त छोटे काशी के नाम से भी पुकारते हैं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव आनंदेश्वर मंदिर परमट पर स्वयं निवास करते हैं, आनंदेश्वर मंदिर परमट पर आने वाले भक्तों के भगवान के दर्शन मात्र से सभी दुःख दर्द मिट जाते हैं। आनंदेश्वर मंदिर ‘परमट’ पर खासकर शिवरात्रि और सावन के महीने में देश-विदेश से लेकर बड़े-बड़े व्यापारी और आम जनमानस का समूह उमड़ता है।

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