कानपुर के ठेले फेरी पान, चाट और समोसे बेचने वाले निकले करोड़पति

उत्तर प्रदेश कानपुर नगर

शहर की रईसी इन आंखों में खेले और फेरी वालों के करोड़ों की संपत्ति,जानकर आयकर विभाग के छूटे पसीने।

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कानपुर के एमएलए और फेरीवाले निकले करोड़पति।img hod

संवाददाता हरिओम द्विवेदी कानपुर सड़क किनारे फेरी लगाने वाले और ठेले पर चाय समोसे और खस्ते, चाट और बेच-बेचकर सैकड़ों व्यापारी करोड़ों में खेल रहे हैं। सकरी ली पतली गलियों-मोहल्लों के छोटे-छोटे किराने की दुकान और छोटे दवा व्यापारी भी करोड़पति हैं। वही सब्जी और कुछ फल विक्रेता भी सैकड़ों बीघा कृषि जमीन के मालिक हैं। एक आम नागरिक के पास शायद एक ही कार हो लेकिन कुछ कबाड़ियों के पास तीन-तीन कारें हैं। लेकिन ये न तो आयकर के नाम पर एक पैसा टैक्स दे रहे हैं न ही जीएसटी। बिग डेटा सॉफ्टवेयर, आयकर विभाग और जीएसटी रजिस्ट्रेशन की जांच में ऐसे 256 ठेले वाले करोड़पति निकले हैं।

देखने सुन्ने में ‘गरीब’ दिखने वाले छुपे धन्नासेठों पर आयकर विभाग की लंबे समय से नजरें तिरछी हो गई वही आयकर विभाग ने खुफिया जानकारी जुटा रहे थे। केवल इनकम टैक्स देने वाले और रिटर्न भरने वाले करदाताओं की मानीटरिंग के अलावा गली मोहल्लों में धड़ल्ले से मोटी कमाई कर रहे ऐसे व्यापारियों का डेटा भी विभाग लगातार जुटा में लगा था वही अत्याधुनिक टेक्नोलाजी ने खुफिया करोड़पतियों को पकड़ना शुरू कर दिया है।

सर के बल विक्रेता समोसे वाले भी निकले करोड़पति

चार साल में खरीद ली 375 करोड़ की प्रापर्टी
जीएसटी रजिस्ट्रेशन से बाहर इन व्यापारियों ने एक पैसा टैक्स का नहीं दिया लेकिन चार साल में 375 करोड़ रुपए की प्रापर्टी खरीद ली। ये संपत्तियां आर्यनगर, स्वरूप नगर, बिरहाना रोड, हूलागंज, पीरोड, गुमटी जैसे बेहद महंगे कामर्शियल इलाकों में खरीदी गईं। दक्षिण कानपुर में रिहायशी जमीनें भी खरीदीं। 30 करोड़ से ज्यादा के केवीपी खरीद डाले। 650 बीघा कृषि जमीन के मालिक भी ये बन गए। ये जमीनें कानपुर देहात, कानपुर नगर के ग्रामीण इलाकों, बिठूर, नारामऊ, मंधना, बिल्हौर, ककवन, सरसौल से लेकर फरुखाबाद तक खरीदी गईं हैं। आर्यनगर की दो, स्वरूप नगर की एक और बिरहाना रोड की दो पान दुकानों के मालिकों ने कोरोना काल में पांच करोड़ की प्रापर्टी खरीदी है। मालरोड का खस्ते वाला अलग-अलग ठेलों पर हर महीने सवा लाख रुपए किराया दे रहा है। स्वरूप नगर, हूलागंज के दो खस्ते वालों ने दो इमारतें खरीद लीं। लालबंगला का एक और बेकनगंज के दो कबाड़ियों ने तीन संपत्तियां दो साल में खरीदी हैं, जिनकी बाजार कीमत दस करोड़ से ज्यादा है। बिरहाना रोड, मालरोड, पी रोड के चाट व्यापारियों ने जमीनों पर खासा निवेश किया। जीएसटी रजिस्ट्रेशन से बाहर छोटे किराना व्यापारियों और दवा व्यापारियों की संख्या 65 से ज्यादा है जिन्होंने करोड़ों रुपए कमाए हैं।

चालाकी के बावजूद खा गए गच्चा
आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जब अकूत कमाई हो रही हो तो निवेश के रास्ते हर व्यक्ति तलाशता है। चूंकि ठेले-खोमचे वालों का लाइफस्टाइल बेहद सादा होता है इसलिए उनके खर्च सीमित और बचत ज्यादा होती है। पैसा किसी विभाग के नजरों में न आ पाए इसके लिए उन्होंने चालाकी तो दिखाई लेकिन गच्चा खा गए। नज़र से बचने के लिए सहकारी बैंकों और स्माल फाइनेंस में खाते खुलवाए। प्रापर्टी में ज्यादातर निवेश भाई, भाभी, चाचा, मामा और बहन के नाम किया गया है लेकिन पैन कार्ड अपना लगा दिया। केवल एक प्रापर्टी में पैन कार्ड और आधार आते ही पूरा कच्चा चिट्ठा खुल गया।

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