अमर शहीद वीरांगना ऊदा देवी पासी बलिदान दिवस समारोह संपन्न

कानपुर नगर

कानपुर। राष्ट्रीय पासी समाज संघ ;आर.पी.एस.एस.द्ध द्वारा अमर शहीद वीरंगना ऊदा देवी पासी बलिदान दिवस समारोह का आयोजन शहीद पार्क ;अमर शहीद बृजेन्द्र स्वरूप वर्माद्ध खाड़ेपुर नौबस्ता कानपुर में 18 नवंबर 2018 दिन रविवार को आयोजित हुआ। इस अवसर पर पासी समाज के कैलेण्डर का विमोचन, पासी समाज के शैक्षिक सामाजिक व व्यावसायिक प्रतिभाओं का अलंकरण समारोह संपन्न हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि मा. आर.के. चैधरीपूर्व मंत्री उ.प्र. सरकार, विशिष्ट अतिथि मा. कन्हैयालाल राष्ट्रीय अध्यक्ष आर.पी.एस.एस. व निदेशक से.नि. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग भारत सरकार नई दिल्ली, मा. आर.एस. पंकज आई.ए.एस. से.नि. व पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त उ.प्र. मा. आर.पी. विमल राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आर.पी. एस.एस. नई दिल्ली, प्रेमी जी बौ( प्रान्तीय उपाध्यक्ष दि बु(िष्ट सोसाइटी आफ इण्डिया ने कार्यक्रम में शिरकत की। सभी अतिथियों का जिलाध्यक्ष विजयलाल पासी ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।


जिलाध्यक्ष विजयलाल पासी ने बताया कि ऊदादेवी पासी का जन्म लखनऊ के उजरियाँव गांव लखनऊ में पासी परिवार में हुआ था। इनके पति मक्का पासी लखनऊ के उदयगंज के निवासी थे। मक्का पासी वाजिद अली की शाही सेना में हवलदार थे। 10 जून 1857 को चिनहट के निकट इस्माइलगंज लखनऊ में अंग्रेजों से भयंकर यु( हुआ था जिसमें मक्का पासी शहीद हो गये थे। ऊदा देवी पासी नवाब वाजिद अली शाह की महिला बटालियन की कमांडर थी। उन्होंने बेगम हजरत महल के निर्देश पर अंग्रेज फौज का सामना किया। सिकन्दरबाग में घमासान यु( हुआ। इस यु( में 2000 से अधिक सैनिक मारे गये।

जनरल कैम्पवेल की अंग्रेजी फौज के 36 अंग्रेज सैनिकों को अकेले ऊदा देवी पासी ने मारकर मौत के घाट उतार दिया। 16 नवंबर 1857 को इसी रणभूमि में वे शहीद हो गयी। क्विकर वालेस ने कैप्टन डायसन को साथ लेकर जब ऊदा देवी पासी की लाश को देखा तो रोने लगा और कहा कि ये तो महिला है। उसने यह कहा कि ‘यदि मुझे मालूम होता कि जिस पर मैने गोली चलाई वह पुरुष नहीं बल्कि एक महिला है तो मैं हजार बार मरता परन्तु अपने देश के लिए लड़ने वाली इस बहादुर महिला को कभी न मारता। ’
दलित और पिछड़े समाज के ऐसे हजारो वीर वीरांगनाओं के बलिदान को जातिवादी सोच के इतिहासकारों ने नजर अंदाज किया। इन वीर वीरांगनाओं को उचित सम्मान दिलाने के लिए संगठित होकर संघर्ष करना होगा। पासी समाज के लगभग 40 किले खण्डहर और टीले की शक्ल में आज भी मौजूद हैं। ये उपेक्षा के शिकार हैं। आप सभी से अनुरोध है कि समाज के खोए हुए मान-सम्मान व स्वाभिमान को प्राप्त करने के लिए संगठित हो। कार्यक्रम का संचालन राम कुमार वर्मा व जागेश्वर कैथल ने किया। इस अवसर पर जगदीश नरायन, संजय आर्या महासचिव, एन.के. चैधरी, रामदीन पासी व शिव प्रसाद, राजेन्द्र प्रसाद एड., एम.पी. वर्मा, संजय चैधरी जिला पंचायत सदस्य, सन्दीप पासवान, रमाकान्त प्रधान, सिपाहीलाल, रामनाथ, राजवर्मा, राम बालक, रामू, सतपाल, राजनाथ सरोज, बरातीलाल, सन्तू, सन्तराम गूजर, नरेशपासी, सर्वेश, वंशीलाल सरोज, राजेश भारती प्रधान, धर्मेन्द्र कुमार, रमेश पासवान, जमुनादेवी पासी आदि ने विचार व्यक्त किये।
विभिन्न क्षेत्रों में सम्मानित किये गये-
1. विद्यालय संचालन- विजयलाल पासी, एम.पी. वर्मा, लक्ष्मीनरायन, राम आसरे, राम लखन, कुन्दनलाल आदि।
2. साहित्यकार- जे.एन. आदित्य जी, प्रेमी जी बौ(
3. बच्चों को उच्च शिक्षा देने में – कुवेर जी ;बेटा शहीद आफीसरद्ध, आर.डी. वर्मा ;बेटी एम.बी.बी.एस.द्ध, आर.एस. वर्मा ;बेटा एम.बी.बी.एस.द्ध
4. मेधावी छात्र/छात्रा – विद्या वर्मा 82 प्रतिशत इंटर
5. कला-राजीव पेंटर

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